नगर निगम का अर्थ व परिभाषा

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शासन अथवा सरकार हमें चार स्तरों पर देखने को मिलती है जिसमें सर्वोच्च स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय सरकार मध्यम स्तर पर राष्ट्रीय एवं प्रांतीय सरकार तथा स्थानीय स्तर स्थानीय सरकार तथा देखने को मिलती है। लेकिन स्थानीय स्वशासन लोकंतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा के रूप में जानी जाती है। इसके द्वारा ही स्थानीय समस्याओं का उचित निवारण […]

बोध का अर्थ और परिभाषा

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‘बोध’ शब्द संस्कृत की ‘बुध’ धातु से बना है जो भ्वादिगण और दिव्यादिगण की धातु है; जिसका अर्थ है जानना। ‘संस्कृत शब्दार्थ-कौस्तुभ’ में बोध का अर्थ इस प्रकार दिया है – “जानना, समझना, पहचानना, ध्यान देना, सोचना, विचारना, जागना, होश में आना।” इसी कोश में ‘बोध’ शब्द के विषय में यह अर्थ- विवेचन दृष्टव्य है- […]

यथार्थ का अर्थ और परिभाषा

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यथार्थ का सामान्यत: अर्थ-सत्य, वास्तविक वस्तु स्थिति है, किन्तु यथार्थ का विग्रह करने पर यथा + अर्थ, यथा का अर्थ है जिसका जो अर्थ हो, जिसकी जो स्थिति है, जो रूप है, जो दशा है, जो सत्य है, वही यथार्थ है। ‘यथार्थ’ शब्द दो पदों के योग से बना है : ‘यथा’ और ‘अर्थ’। ‘यथा’ […]

मेवाड़ का इतिहास

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मेवाड़ का इतिहास भारतीय संस्कृति तथा उसके विविध पक्षों की विकासात्मक गतिविधियों के संचालित करने की दृष्टि से भी अत्यधिक समृद्ध रहा है। मेवाड़ के इतिहास के राजनीतिक घटना चक्र के समानान्तर ही इस प्रदेश में संचालित होती रहने वाली सांस्कृतिक एवं कलात्मक गतिविधियों से यह स्पष्ट होता है कि सामान्य रूप में मानव सभ्यता […]

बैंक के कार्य

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किसी बैंक संस्था के दो मुख्य कार्य हैं :- जमा के रुप में धनराशि स्वीकार करना तथा ऋण अथवा उधार देना। इनका विस्तृत विवरण इस प्रकार हैं :- जमाएँ स्वीकार करना बैंक में कोई भी व्यक्ति निर्धारित नियम एवं व्यवस्था के अंतर्गत खाता खुलवाकर अपनी धनराशि जमा करवा सकता है। व्यापारिक बैंकों द्वारा जमा राशि […]