भारतीय दर्शन क्या है?

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भारतीय दर्शन अध्यात्म विद्या है। भारत में दर्शनशास्त्र मूल रूप से आध्यात्मिक है। ‘दर्शन’ शब्द दर्शनार्थक दृश् धातु से बनता है जिसका अर्थ है देखना या अवलोकन करना। अत: इसका व्युत्पत्तिलभ्य अर्थ किया जाता है ‘दृश्यते अनेन इति दर्शनम्’ अर्थात् जिसके द्वारा देखा जाय और क्या देखा जाय ? साधारणत: हम आँखों से देखते हैं […]

आर्थिक विकास का अर्थ

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आर्थिक संवृद्धि राष्ट्रीय आय में निरन्तररूप से होने वाली वृद्धि है। यह आर्थिक विकास से भिन्न है। जनसंख्या में अन्तरों का ध्यान में रखते हुए यह प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के रूप में दिखाई पड़ती है (प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या) यद्यपि राष्ट्रीय आय की वृद्धि में प्रतिवर्ष उतार-चढ़ाव अथवा […]

अर्थव्यवस्था का अर्थ, विशेषताएं एवं प्रकार

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अर्थव्यवस्था मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि करने के लिये एक मानव निर्मित संगठन है। ए.जे. ब्राउन के अनुसार, ‘‘अर्थव्यवस्था एक ऐसी पद्धति है जिसके द्वारा लोग जीविका प्राप्त करते हैं।’’ जिस विधि से मनुष्य जीविका प्राप्त करने का प्रयास करता है वह समय तथा स्थान के सम्बन्ध में भिन्न होती है। प्राचीनकाल में, ‘जीविका प्राप्त करना’ […]

बेन्थम का राजनीतिक विचार

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बेन्थम का राजनीति-दर्शन के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है। उसकी महत्त्वपूर्णदेनों को भुलाया नहीं जा सकता। उसके विचार शाश्वत सत्य के हैं जो आधुनिक युग में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। बेन्थम का राजनीतिक विचार राजनीतिक दर्शन के इतिहास में यह एक विवादास्पद मुद्दा रहा है कि क्या बेन्थम को एक राजनीतिक दार्शनिक माना जाएया […]

जेरेमी बेन्थम का सिद्धान्त

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जेरेमी बेन्थम का उपयोगितावाद का दर्शन गलत धारणाओं पर आधारित है। बेन्थम ने सुख औरआनन्द को समानाथ्र्ाी मान लिया है। यह अन्तर्विरोधों से ग्रस्त है। यह गुणात्मक पहलू की उपेक्षा करता है। उसका सुखवादीमापन यन्त्र वैज्ञानिक तरीका नहीं है। ‘सबसे बड़ा सुख’ और ‘सबसे बड़ी संख्या’ के मध्य कोई तार्किक सम्बन्ध नहीं है। यह सिद्धान्त […]